महापर्व छठ पूजाः आज अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को दिया जाएगा पहला अर्घ्य

AajKiDuniya 26/10/2017

  नई दिल्ली। भगवान भास्कर की आराधना का लोक आस्था का चार दिवसीय महापर्व छठ पूजा अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है। बिहार के इस लोकपर्व की छटा पूरे देश में दिखाई दे रही है। पवित्र नदियों व जलाशयों के घाटों की साफ सफाई का कार्य पूरा हो चुका है।
   
   आज यानी गुरुवार की शाम को अस्ताचलगामी भगवान भास्कर को छठव्रती पहला अर्घ्य देंगे। उसके बाद शुक्रवार की प्रात: व्रतियों द्वारा उदीयमान सूर्य को अर्घ्य देने के साथ यह महापर्व संपन्न हो जाएगा। पटना से लेकर राजधानी दिल्ली तक हर जगह छठगीतों की मधुर ध्वनि कानों में भक्तिमय मधुर रस घोल रही है।
   
   गौरतलब है कि मंगलवार को नहाय-खाय के साथ यह महापर्व प्रारंभ हुआ था। इस दिन पूरे देश में इस महापर्व की शुरुआत व्रतियों और श्रद्धालुओं ने विभिन्न नदियों एवं तालाबों में स्नान करने के बाद चने की दाल, कद्दू की सब्जी व अरवा चावल से बनाये प्रसाद का ग्रहण कर किया था।
   
   ज्योतिषियों के मुताबिक नहाय-खाय पर यानी छठ पूजा के पहले दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी थी। गणेश जी हर काम में मंगल ही मंगल करेंगे। पहले दिन सूर्य का रवियोग भी था। ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बना। रवियोग में छठ का विधि-विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, चाहे शनि राहु कितना भी भारी क्यों ना हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाता है। ऐसे महासंयोग में यदि सूर्य को अर्घ्य देने के साथ हवन किया जाए तो आयु बढ़ती है।
   
   बीते कल बुधवार को खरना (लोहंडा) था। इस दिन व्रतधारियों ने दिन भर का उपवास ऱखा और शाम को स्नान करने के बाद गन्ने के रस अथवा गुड, दूध और चावल की बनी खीर के साथ चावल के आटा का पिट्ठा तथा घी चुपडी रोटी का प्रसाद भगवान सूर्य को अर्पित करने के बाद उसे ग्रहण किया तथा श्रद्धालुओं के बीच वितरित किया। खरना के बाद व्रतियों का 36 घंटे का निर्जला उपवास शुरु हो गया। बता दें कि इस महापर्व को बड़ी पवित्रता के साथ मनाया जाता है।

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