रश्मिरथी भगवान सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ महापर्व संपन्न

AajKiDuniya 27/10/2017

  नई दिल्ली। प्रकृति के अंतिम स्वरूप और ऊर्जा के अक्षुण्ण स्रोत रश्मिरथी भगवान भास्कर को गाय के दूध से अर्घ्य देने के साथ ही चार दिवसीय लोकआस्था के महापर्व छठ पूजा का समापन हो गया। कल शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य दिया गया बिहार के इस लोकपर्व की छटा पूरे देश में दिखाई दी। पवित्र नदियों व जलाशयों पर करोड़ों छठव्रतियों ने शुक्रवार की सुबह सूर्य को अर्घ्य दिया। यह पहला ऐसा पूजा है जिसमें डूबते सूर्य की भी आराधना की जाती है।
   
   'उगते सूरज की पूजा' तो संसार का विधान है, पर केवल और केवल हम 'भारतवासी' अस्ताचल सूर्य की भी अराधना करते हैं, और वो भी, उगते सूर्य से पहले। अगर 'उदय' का 'अस्त' भौगोलिक नियम है, तो 'अस्त' का 'उदय' प्राकृतिक और आध्यात्मिक सत्य।
   
   पटना से लेकर राजधानी दिल्ली तक हर जगह छठगीतों की मधुर ध्वनि कानों में भक्तिमय मधुर रस घोल रही है। इस छठ पर्व का महत्व इस बार इसलिए बढ़ गया था क्योंकि ज्योतिषियों के मुताबिक नहाय-खाय पर यानी छठ पूजा के पहले दिन मंगलवार को गणेश चतुर्थी के साथ ही सूर्य का रवियोग भी था। ऐसा महासंयोग 34 साल बाद बना है। गणेश जी हर काम में मंगल ही मंगल करेंगे। वहीं, रवियोग में छठ का विधि-विधान शुरू करने से सूर्य हर कठिन मनोकामना भी पूरी करते हैं। चाहे कुंडली में कितनी भी बुरी दशा चल रही हो, चाहे शनि राहु कितना भी भारी क्यों ना हों, सूर्य के पूजन से सभी परेशानियों का नाश हो जाता है।

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